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स्वप्न फल – स्वप्न फल शुभाशुभ दर्शन- स्वप्न फल वर्णमाला क्रमानुसार…

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स्वप्न फल – स्वप्न फल शुभाशुभ दर्शन- स्वप्न फल वर्णमाला क्रमानुसार… स्वप्न फल / शुभाशुभ दर्शन / वर्णमाला क्रमानुसार विशेष : स्वप्न केवल संकेत होते हैं सोते समय चेतना की विद्युतीय तरंगें,मस्तिष्क के नियंत्रण से मुक्त होती हैं। वे तीव्र भी हो जाती हैं। प्राकृतिक क्षमता से ही वह ब्रह्माण्ड की तरंगों में जा मिलती हैं और घटना या परिस्थितियों का पूर्वाभास होने लगता है, क्योंकि इन तरंगों के बहुक्रम संयोग से ही घटनाएं या परिस्थितियां बनती हैं। स्वप्न के बारे में फ्रॉयड का यह दृष्टिकोण कि कुठित इच्छा ही स्वप्न में दिखाई पड़ती है, गलत है। प्रत्येक व्यक्ति अपने स्वप्नों पर विचार करे,तो उसे स्वयं अनुभव होगा कि उसे आने वाले अनेक कष्टमय और सुखमय समय का पूर्वाभास इन स्वप्नों से मिला है। स्वप्न की सूचना ने संसार में कई व्यक्तियों को धनकुबेर बना दिया, परमाणु की संरचना को स्पष्ट किया, कई गुप्त पुरातत्व के स्थलों की निशानदेही की, और कई महत्वपूर्ण घटनाओं को स्पष्ट किया। प्रत्येक व्यक्ति को ये स्वप्न-संकेत प्राप्त होते हैं। अनेक इसको सत्य मानकर सूचना पकड़ लेते हैं, अनेक इस पर विचार ही नहीं करते। घटनाओं का ...

22 सितम्बर/जन्म-दिवस- देशभक्त श्री वी.एस श्रीनिवास शास्त्री ।

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        ।।⛳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।।  22 सितम्बर/जन्म-दिवस- देशभक्त श्री वी.एस श्रीनिवास शास्त्री । अपने विचारों की स्पष्टता के साथ ही दूसरे के दृष्टिकोण को भी ठीक से सुनने, समझने एवं स्वीकार करने की क्षमता होने के कारण श्री वी.एस श्रीनिवास शास्त्री एक समय गांधी जी और लार्ड इरविन में समझौता कराने में सफल हुए। इसके लिए 4 मार्च, 1931 को वायसराय ने पत्र द्वारा उन्हें धन्यवाद दिया – गांधी जी से समझौता कराने में आपने जो भूमिका निभाई है, उसके लिए मैं आपका आभारी हूँ। आपकी भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण थी। वालंगइमान शंकरनारायण श्रीनिवास शास्त्री का जन्म ग्राम वालंगइमान (जिला तंजौर, कर्नाटक) में 22 सितम्बर, 1869 को हुआ था। यह ग्राम प्रसिद्ध तीर्थस्थल कुम्भकोणम के पास है, जहाँ हर 12 वर्ष बाद विशाल रथयात्रा निकाली जाती है। इनके पिता एक मन्दिर में पुजारी थे। माता जी भी अति धर्मनिष्ठ थीं। अतः इनका बचपन धार्मिक कथाएं एवं भजन सुनते हुए बीता। इसका इनके मन पर गहरा प्रभाव हुआ और इन संस्कारों का उनके भावी जीवन में बहुत उपयोग हुआ। शिक्षा के प्रति अत्यधिक अनुराग होने के कार...