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22 सितम्बर/जन्म-दिवस- देशभक्त श्री वी.एस श्रीनिवास शास्त्री ।

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        ।।⛳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।।  22 सितम्बर/जन्म-दिवस- देशभक्त श्री वी.एस श्रीनिवास शास्त्री । अपने विचारों की स्पष्टता के साथ ही दूसरे के दृष्टिकोण को भी ठीक से सुनने, समझने एवं स्वीकार करने की क्षमता होने के कारण श्री वी.एस श्रीनिवास शास्त्री एक समय गांधी जी और लार्ड इरविन में समझौता कराने में सफल हुए। इसके लिए 4 मार्च, 1931 को वायसराय ने पत्र द्वारा उन्हें धन्यवाद दिया – गांधी जी से समझौता कराने में आपने जो भूमिका निभाई है, उसके लिए मैं आपका आभारी हूँ। आपकी भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण थी। वालंगइमान शंकरनारायण श्रीनिवास शास्त्री का जन्म ग्राम वालंगइमान (जिला तंजौर, कर्नाटक) में 22 सितम्बर, 1869 को हुआ था। यह ग्राम प्रसिद्ध तीर्थस्थल कुम्भकोणम के पास है, जहाँ हर 12 वर्ष बाद विशाल रथयात्रा निकाली जाती है। इनके पिता एक मन्दिर में पुजारी थे। माता जी भी अति धर्मनिष्ठ थीं। अतः इनका बचपन धार्मिक कथाएं एवं भजन सुनते हुए बीता। इसका इनके मन पर गहरा प्रभाव हुआ और इन संस्कारों का उनके भावी जीवन में बहुत उपयोग हुआ। शिक्षा के प्रति अत्यधिक अनुराग होने के कार...

07 सितम्बर/जयंती विशेष-राष्ट्रऋषि श्री राजनारायण बसु।

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           ।।⛳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।।  07 सितम्बर/जयंती विशेष-राष्ट्रऋषि श्री राजनारायण बसु। बंगाल की अनेक विभूतियों ने भारत देश और हिन्दू धर्म को सार्थक दिशा दी है। 07 सितम्बर, 1826 को बोड़ाल ग्राम में जन्मे राष्ट्रऋषि श्री राजनारायण बसु भी उनमें से एक थे। इनके पूर्वज बल्लाल सेन के युग में गोविन्दपुर में बसे थे। कुछ समय बाद अंग्रेजों ने इसे फोर्ट विलियम में मिला लिया। अतः इनका परिवार पहले ग्राम सिमला और फिर बोड़ाल आ गया। सात वर्ष की अवस्था में श्री बसु ने शिक्षारम्भ कर अंग्रेजी ,लेटिन, संस्कृत और बंगला का गहन अध्ययन किया। 1843में ब्राह्मधर्म के अनुयायी बनकर ये महर्षि देवेन्द्रनाथ के संपर्क में आये। इनके आग्रह पर उन्होंने चार विद्वानों को काशी भेजकर वेदाध्यन की परम्परा को पुनर्जीवित किया था। 1847 में इन्होंने केन, कठ, मुण्डक तथा श्वेताश्वर उपनिषद का अंग्रेजी में अनुवाद किया। शिक्षा पूर्णकर 1851 में इन्होंने अध्यापन कार्य को अपनाया। राजकीय विद्यालय में ये पहले भारतीय प्राचार्य बने। उन्होंने  1857 के स्वाधीनता संग्राम के उत्साह और उसकी ...

07 सितम्बर/पुण्य-तिथि विशेष.. सिख पन्थ के प्रवर्तक श्री गुरु नानकदेव जी।

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          ।।⛳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।।  07 सितम्बर/पुण्य-तिथि विशेष.. सिख पन्थ के प्रवर्तक श्री गुरु नानकदेव जी।  गुरु नानकदेव का जन्म कार्तिक पूर्णिमा, विक्रमी सम्वत1526 (15 नवम्बर, 1469) को अविभाजित पंजाब के तलवण्डी गाँव में श्री मेहता कल्याणदास तथा माता श्रीमती तृप्तादेवी के घर में हुआ था। आज यह स्थान पाकिस्तान में है तथा ननकाना साहिब कहलाता है। इनका वंश भगवान् राम के पुत्र कुश से सम्बन्धित माना जाता है। नानकदेव जी बचपन से ही आध्यात्मिक रुचि रखते थे; पर वे बिना विचारे धार्मिक रीतियों के पालन के पक्षधर नहीं थे। नौ वर्ष की अवस्था में जनेऊ संस्कार के समय उन्होंने पण्डित जी से ऐसा जनेऊ पहनाने को कहा, जो दया की कपास तथा सन्तोष के सूत वाला हो। एक बार उनके पिता ने कुछ धन देकर उन्हें सच्चा सौदा करके आने को कहा। नानकदेव जी ने उससे साधु सन्तों को भोजन करा दिया। उनकी ऐसी बातों से सब चकित रह जाते थे।